एक बहुत ही छोटी सी लव-स्टोरी

13 12 2007

लड़की – I love you.
लड़का – Yeah, I love you too.
(संछिप्त चुम्बन का आदान-प्रदान और थोडी देर के बाद…)
लड़की – मैं तुम्हे बता नही सकती की मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ.
लड़का – ह्म्म्म! (मुस्कुराते हुए)
लड़की – तुम मुझे अपने पलकों पे बिठा के रखोगे ना!

(यहाँ पलकों पे बिठाने का मतलब बहुत कुछ हो सकता है, जैसे, हमेशा बकवास सुनना, कभी नही डांटना, हमेशा डांट सुनना, हर बात पे अपनी गलती कबूल करना, माफ़ी माँगना, जो कहा जाए वह करना, जैसे कहा जाए वैसे करना, जितना कहा जाए उतना करना. तो कहने का मतलब यह है कि ऐसी स्थिति में सिर्फ़ पलकों पे बिठाने से काम नही चलने वाला. इस कार्यक्रम के अंतर्गत बहुत सारी बातें हो सकती हैं, जैसे – पलकों पे बिठाना, लेटाना, उठाना, चढाना, लटका देना, ब्लेह, ब्लेह… और आख़िर में अपने पलकों पे हुंक लगा के, रस्सी बाँध के, और दूसरा सिरा अपने गले में लटका के ख़ुद ही लटक जाना)

लड़का – हेंह!! क्यों? (सिर ऊपर उठाते हुए)
लड़की – मैं तुमसे प्यार करती हूँ न इसलिए! (अगराते हुए, थोडी शोख अदा में)
लड़का – वो तो मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ.
लड़की – लल्लू, मैं तुमसे बहूत ज्यादा प्यार करती हूँ तो तुम इतना तो करोगे ही मेरे लिए.
लड़का – मैं भी उतना ही करता हूँ. तुमने कहाँ ऐसा कुछ किया मेरे साथ!
लड़की – तो तुम मुझे पलकों पे बिठा के नही रखोगे जानू! तुम ऐसा करोगे?
लड़का – और नही तो क्या, तुमने कौन सा पलकों पे रखा है मुझे!
लड़की – तुम मुझे प्यार नही करते!
लड़का – कितनी बार एक ही बात बोलूं राजमाता!
लड़की – तुमने इनकार किया इसका मतलब तो यही लगता है.
लड़का – जी नही मोहतरमा! इसका मतलब यह है कि मैं भी आपसे उतना ही प्यार करता जितना आप मुझसे. तो या तो हम दोनों एक दुसरे के पलकों पे लेते रहते हैं नही तो कोई भी नही! 😀
लड़की – I hate you.
लड़का – Okay!
लड़की – मैं जा रही हूँ.
लड़का – ठीक है.
लड़की – हमेशा के लिए! (पाँव पटकते हुए कमरे से बाहर निकल जाती है)
लड़का – बाय! (लड़का अपनी कुर्सी पे, लड़की दरवाजे के बाहर, और फ़िर सब कुछ खुशनुमा हो जाता है)

🙂
(just a time-pass…coz the winter is too beautiful outside.)

Advertisements